कोई ख़ास संघर्ष होता नही बस सिर्फ एक फर्जी संघर्ष कहानी



एमपी नाउ डेस्क



व्यक्तिगत वैचारिक लेख:  काफ़ी समय पूर्व लोगों में बड़प्पन दिखाने का शौक था अपने परिवार का रूतवा खानदान की शान, रॉयल फैमिली जैसे वाक्यों को और ज्यादा ही तरीकों से बड़ा चढ़ा का दिखाया जाता था।

यह एक प्रतिष्ठा का प्रतीक था पर अब समय बदल रहा है, लोग अपने परिवार अपनी पुरानी पहचान छुपाकर ज्यादा से ज्यादा साधारण परिवार संघर्ष पूर्व जीवन दिखाने की कोशिश में लगे हुए है। एक समाज के तौर में यह परिवर्तन क्यों आ रहा है कभी सोचने की कोशिश कि...

सारा अली खान अपने ड्रेस के कीमत का ऐसा शो ऑफ करती है, मीडिया में खबर बन जाती है एक्ट्रेस सारा अली खान तो एक साधारण सी लड़की है आपके ही जैसी है कोई भी ऐसे ही रोड साइड मार्किट में से शॉपिंग करती है। ऐसे ही आम लोगों के जैसे ही सामान्य तौर में यात्रा में निकल जाती है। बिल्कुल ही आपके जैसी ही है, अनन्या पांडे हो या फिर श्रद्धा कपूर सब लगी है अपने आप को डाउन टू अर्थ दिखाने के लिए .. इससे क्या फ़ायदा होता होगा

यह सब के सब गरीबी को भी गरीब से हथियाने में लगे हुए है... डाउन टू अर्थ जैसा कुछ भी नही है इनके अंदर यह तो गरीबी और संघर्ष नाम का एक मात्र सहारा किसी गरीब परिवार के व्यक्ति के पास था वह भी यह लोग उन लोगों से छीनना चाहते है।

अब सदी के महानायक कहे जाने वाले अमिताभ बच्चन को लेकर यह कहानी सुनाई जाती है, वह मुंबई में संघर्ष के दिनों में मरीन ड्राइव की सड़को में रात गुजारा करते थे.. यह कैसे हो सकता है जिसके पिता एक विख्यात कवि मां इंदिरा गांधी की दोस्त वह सड़को में रात बितायगा।

इतने भी गरीब नही है.. ये बच्चन महाशय अब आगे बढ़ते है दूसरा नाम शाहरुख खान की कहानियां में ऐसी ऐसी बातें भरी गई है की भाई किंग खान ने मुंबई में रहकर खाना नही खाया उनका परिवार भूखा रहता था.. बड़े संघर्ष के बाद वह किंग खान है सफल है जो भी....

अब उनकी भी पारिवारिक पृष्ट भूमि बताता हूं शाहरुख के पिता मीर ताज मोहम्मद खान पेशे से सरकारी चीफ इंजीनियर थे वहीं मां लतीफ फातिमा खान प्रथम श्रेणी की मजिस्ट्रेट थीं, उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का करीबी भी बताया जाता है। 

अब ऐसा पारिवारिक पृष्ट भूमि वाले व्यक्ति को दो वक्त की रोटी नसीब नही होगी! क्या बकवास है...

सब लोगों को भ्रमित करके आपकी भावना का उपयोग करके अपने कार्य सिद्ध करने वाले काम है।

आज के समय के एक्टर या अभिनेत्री जो भी अपने आप को साधारण बताकर चाहे वह कार्तिक आर्यन हो स्वर्गीय सुंशांत सिंह राजपूत जैसे अभिनेता यह सब एक बेहतर पारिवारिक पृष्ट भूमि से आते है।

हां इनका संघर्ष बस इतना हो सकता है यह एक नॉन पारिवारिक फिल्मी बैकग्राउंड से आते है। ऐसे तो फिर कई आम लोग हैं जो अपनी जगह विभिन्न प्रकार की इंडस्टी में बनाने की शुरुआत करते है। 

इनका कोई ख़ास संघर्ष होता नही इनकी सिर्फ एक फर्जी संघर्ष कहानी

होती है, जिसे वक्त और समय के हिसाब से बदला जा सकता है।

अरविंद साहू (AD) Freelance मनोरंजन एंटरटेनमेंट Content Writer हैं जो विभिन्न अखबारों पत्र पत्रिकाओं वेबसाइट के लिए लिखते है। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में भी सक्रिय है, फिल्मी कलाकारों से फिल्मों की बात करते है। एशिया के पहले पत्रकारिता विश्वविद्यालय माखन लाल चतुर्वेदी के भोपाल कैम्पस के इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के छात्र है।

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