क्यो स्त्री को देवी का दर्जा दिया गया है कविता मिश्रा DU स्टूडेंट्स और पत्रकार दिल्ली।

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एमपी नाउ डेस्क

स्वतंत्र विचार:- क्यो स्त्री को देवी का दर्जा दिया गया है ऐसे ही कोई किसी को भगवान की उपाधि नहीं देता इसके पीछे भी लोगो का खुद का स्वार्थ छिपा हैस्त्री को देवी बोलते है ताकि उसको महसूस करा सके तुम महान हो तुम ममता की मूर्त हो, तुम प्रेम का भंडार हो तुम सिर्फ त्याग और समर्पण के लिए बनी हो तुमको बस चुप रहके, हंसके सब सहना है क्योकि तुम देवी हो देवी तो भगवान होती है, भगवान किसी चीज की अपेक्षा नहीं करते वो सिर्फ देना जानते हैं, लेना नहीं फिर बात चाहे मान-सम्मान की हो या सपनो की तुम तो देवी हो, तुम तो घर की मालकिन हो सब कुछ सिर्फ तुम्हारा ही तो है लेकिन जहां तुम अपने हक की, अपने सपनों की बात करोगी वहीं तुम्हारे पंख काट दिए जाएंगे, क्योकि तुम तो देवी हो और देवी सिर्फ त्याग और समर्पण  के लिए बनी हैं तुम बनी ही सिर्फ इसलिए हो ताकि हर वो चीज जिसपर तुम्हारा हक है वो तुम दूसरों की थाली में परोस सको हक चाहे जायजाद में हो या थाली में रखी घी वाली रोटी का..

तुम को हमेशा यही सिखाया जाएगा की तुम तो देवी हो
तुम तो त्याग की मूर्त हो, इस सब का तुम क्या करोगी तुम बस अपने कपड़े अपने साज शृंगार में ध्यान दो जो तुम्हारी खुबसुरती में चार-चांद लगाएंगे तुम पढ़ लो कितना भी लेकिन साथ में चूल्हा-चौका जरुर सिखाएंगे कल को शादी के बाद ससुराल में ये ही तो काम आएगा..
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तुम सिर्फ अत्याचार सहने के लिए और चुप रहने के लिए बनी होऔर जहां तुम अपने पर हो रहे अत्याचार के लिए आवाज उठाएगी वहीं ये समाज जो तुमको देवी कहता है तुमको कुलक्ष्णी, कुलनाशनी जैसे नामों से सम्बोधित करने लगेगा
क्योकिं तुम तो देवी हो त्याग और समर्पण ही तुम्हारा गहना हैं...



कविता मिश्रा
DU STUDENT
Journalist

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