नवाबों के शहर भोपाल में कर रहे आवारा कुत्ते राज।



एमपी नाउ डेस्क

विधायक रेस्ट हाउस के आस पास का क्षेत्र


लेख अरविंद साहू (छात्र mcu)
नज़रिया। भोपाल शहर का इतिहास काफ़ी पुराना है.भोपाल के स्वर्णिम इतिहास में परमार वंश के पराक्रमी राजा भोज का बड़ा योगदान माना जाता है। ऐसा इतिहासकार जनों का मानना है, भोपाल की स्थापना राजा भोज के ही शासन काल मे हुई थी.राजा भोज ने भोजपाल नाम से एक शहर की नींव रखी थी जिसे बाद में भोपाल नाम से जाना जाने लगा।राजा भोज के शासन काल मे स्वर्णिम समय देखने वाला भोपाल परमार वंश के नष्ट होने के बाद कई विदेशी आक्रांताओं द्वारा लूटा गया.


   कई बार उजड़ने के बाद पुनः अफगान के एक सिपाही दोस्त मोहम्मद ने भोपाल को पुनः बसाया भोपाल में दोस्त मोहम्मद के काल मे ही इस्लामी सभ्यता का विकास हुआ.  इतिहास में वर्णित जानकारी अनुसार नबाव की पदवी धारण करने वाला दोस्त मोहम्मद के बाद से ही भोपाल को नबाबों का शहर कहा जाने लगा।
दोस्त मोहम्मद ने गोंड रानी कमलापति जो निजामशाह की विधवा थी उसके राज्य में कब्जा कर भोपाल में क़िलाबन्दी कर इसे शहर का रूप दिया था।
 इतिहासकारों के मत अनुसार रानी कमलापति के द्वारा भोपाल में शासन किया गया रानी के स्मृति के रूप में बड़े तालाब के पास कमला पार्क का निर्माण किया गया. वर्तमान भाजपा सरकार ने हबीबगंज स्टेशन का नाम बदलकर रानी कमलापति स्टेशन कर दिया. ऐसा मानना है कि रानी ने नारी अस्मिता अपनी संस्कृति के लिए प्राण की आहुति दे दिया रानी का जीवन आने वाली पीढ़ियां के लिए प्रेणना है. लोगों को इसकी जानकारी होनी चाहिये. रानी कमलापति के अलावा अन्य कई अन्य मुस्लिम महिलाओं ने भोपाल में स्वतंत्र शासन किया. इसके पश्चात अंग्रजो ने भी कई वर्षों तक भोपाल में अधिपत्य स्थापित किया भारत के आजाद होने के पश्चात 1949 में भोपाल राजाओ, नवाबों के शासन से मुक्त होकर स्वत्रंत भारत का हिस्सा हो गया। राजा भोज से दोस्त मोहम्मद कमलापति से लेकर मुस्लिम महिला शासकों के बाद अंग्रेजों एवं वर्तमान मे मध्यप्रदेश की राजधानी के रूप में नित्य प्रगतिशील भोपाल बढ़ता चला गया। निगम के रूप में प्रगति शील भोपाल अपनी सुंदरता और ऐतिहासिक धरोहर समेटे हुए आकर्षण का केंद है, बड़े बड़े शिक्षण संस्थान माननीयों जनप्रतिनिधियों का कर्म क्षेत्र भोपाल कभी गैस त्रासदी के बाद दुनियाभर के अखबारों, चैनलों की सुर्खियों में छा गया था. कभी किसी भी जगह का सुर्खियों में रहने की वजह  उसकी सकारात्मक बाते होंनी चाहिए न ही नकारात्मक बातें। भोपाल गैस त्रासदी ने वस्तुतः भोपाल की छवि धूमिल की है. जो वक्त के साथ लोगों की आखों से ओझल होते जा रही है.परन्तु 
मैने महसूस किया है, वर्तमान स्थिति में भोपाल में एक बड़ी समस्या की और ध्यान आकर्षित करना चाहता हु यदि इसमें वक्त रहते ध्यान नही दिया गया तो एक विकराल रूप ले सकती है.भोपाल में आवारा श्वानों की संख्या बहुतायत मात्रा में नजर आती है भोपाल की गलियों में झुण्ड बनाये आवारा श्वानों अनायस ही भोंकते है हमेशा डर बना रहता है कही ये काट न ले। इस और भोपाल निगम प्रशासन को ध्यान देने की आवश्यकता है.नबावों का शहर राजा भोज जैसे पराक्रमी राजा का भोपाल जो अपनी ऐतिहासिक धरोहर और मध्यप्रदेश की राजधानी के रूप मे देश दुनिया मे ख्याति प्राप्त कर रहा है वह कहि आवारा कुत्तों का राज व्याप्त न हो जाए।

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