कोरोना वायरस से संक्रमित हर व्यक्ति को जरूरी नही रेमडीसीवर इंजकेशन

कोरोना वायरस से संक्रमित हर व्यक्ति को जरूरी नही रेमडीसीवर इंजकेशन



एमपी नाउ डेस्क



हेल्थ:- भारत मे बढ़ते कोरोना कहर के बीच जहाँ स्वाथ्य व्यवस्था ठप हो चुकी है। जिस वजह से देश मे स्वाथ्य सेवाओं में मारा मारी मची हुई ऐसे में देश के अधिकतर राज्यों में आक्सीजन सिलेंडर से लेकर मेडिसिन की कमी नजर आ रही है जिसकी वजह से ब्लेक मार्किट को हवा मिली है। इन सब के बीच रेडमिसिवर मेडिसिन की चर्चा आम हो चुकी है लोगों के बीच भांति फैल रही है covid 19 का इलाज रेमडी सीवर इंजक्शन है जबकि ऐसा है ही नही
वो सबसे पहले हेपेटाइटीस सी के लिए बनाया गया था। इसके बाद उसे इबोला और मिड‍िल ईस्‍ट रेस्‍प‍िरेटरी सिंड्रोम एमईआरएस के लिए के लिए इस्‍तेमाल किया गया कब होता है रेमडीसीवीर का उपयोग


बहुत अधिक गम्भीर मामलें में वायरस को बढ़ने से रोकता है रेमडेसिविर


कोरोना वायरस शरीर पर आक्रमण करते ही बढ़ने लगता है, वायरस बहुत तेजी से शरीर पर नकारात्मक प्रभाव दिखाता है जिससे कि लक्षण खतरनाक होने लगते हैं, फेफड़े खराब हो जाते हैं। रेमडेसिविर इंजेक्शन लगाने से वायरस का शरीर में बढ़ना रूक जाता है। गंभीर मामलों में ही इस इंजेक्शन का प्रयोग किया जाता है। 

जब शरीर में ऑक्सीजन लेवल कम हो


सामान्य लक्षणों वाले मरीजों को रेमडेसिविर इंजेक्शन नहीं लगाना होता है वे घर पर ही आइसोलेशन और सही देखरेख से ठीक हो सकते हैं लेकिन वे मरीज जिनमें गंभीर लक्षणों के साथ ऑक्सीजन लेवल की कमी पाई जाती है, उन्हें यह इंजेक्शन देना जरूरी हो जाता है। ऑक्सीजन लेवल जब सामान्य से 92 प्रतिशत कम हो तब इंजेक्शन दिया जाता है

 बुखार उतरने का नाम न ले

बुखार कोरोना का मुख्य लक्षण है लेकिन यदि बुखार 100 डिग्री से अधिक हो और दो दिन तक तापमान कम होने का नाम कम न ले, तब रेमडेसिविर इंजेक्शन लगाना आवश्यक हो जाता है। सामान्य बुखार में इंजेक्शन की जरूरत नहीं पड़ती है, मरीज को दवा खाने से लाभ होने लगता है। 

संक्रमण बढ़ जाए यदि फेफड़ो में,


कोरोना वायरस फेफड़ों पर बुरी तरह से हमला करता है। ऐसे में जिन लोगों को पहले से फेफड़ों की कोई समस्या होती है, उनपर तो यह बहुत प्रभावशाली साबित होता है। सीटी स्कैन कराने पर फेफड़ों में 25 प्रतिशत से अधिक संक्रमण नजर आता है तो चिकित्सक रेमडेसिविर इंजेक्शन लगाते हैं।

 Remdesivier इंजकेशन बिना डॉक्टरी सलाह के लेना भी नुकसान दायक हो सकता है।

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एडी साहू(स्वतंत्र)
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