स्कूलों में दी जाना चाहिए रंगकर्म की शिक्षा- ओम पारीक

एमपी नाउ डेस्क

ओम पारीक

■नाट्यगंगा ऑनलाइन पाठशाला- चौदहवा दिन


छिंदवाड़ा । नाट्यगंगा छिंदवाड़ा द्वारा आयोजित राष्ट्रीय स्तर की ऑनलाइन एक्टिंग की पाठशाला के चौदहवे दिन कोयंबटूर तमिलनाडू से श्री ओम पारीक जी विद्वान वक्ता के रूप में उपस्थित हुए। ओम पारीक जी विगत 35 वर्षां से रंगकर्म कर रहे हैं। आपने कोलकाता में श्रीमति उषा गांगुली के साथ लंबे समय तक रंगकर्म किया है। आपने रंगकर्म के साथ ही टीवी एवं फिल्मों भी अभिनय किया है। आप हिंदी, अंग्रेजी एवं बांग्ला भाषा के प्रसिद्ध अनुवादक हैं। कार्यशाला में रंगमंच से शिक्षा एवं दर्शक विषय पर बोलते हुए आपने अपनी रंगयात्रा भी कलाकारों से साझा की। उन्होंने कलाकारों को सलाह दी कि प्रत्येक रंगकर्मी को स्वयं से प्रश्न पूछना चाहिए कि वह रंगकर्म क्यां, किसके लिए और कैसा करना चाहता है। सर ने बताया कि रंगकर्म एक आइना है जिसमें कलाकार खुद को तराश सकता है। रंगकर्म से मिलने वाले लाभ एवं शिक्षा पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि प्रत्येक स्कूल में सिलेबस में रंगकर्म को शामिल किया जाना चाहिए जिससे बच्चों का सर्वांगीण विकास होगा। रंगकर्म से दर्शकों से कैसे जोडें इस विषय पर उन्होंने कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए जिन्हें अपनाकर दर्शकों की संख्या को निश्चित ही बढ़ाया जा सकता है। आज अतिथि के रूप में गिरिजाशंकर जी, ब्रजेश अनय जी और विनोद विश्वकर्मा जी उपस्थित रहे। नाट्यगंगा हमेशा अपने कलाकारों को कुछ न कुछ सीखने का अवसर उपलब्ध करवाती है इस ही श्रृंखला में कार्यशाला का संचालन एवं आभार नए कलाकारों द्वारा भी किया जा रहा है। इस क्रम में आज कार्यशाला का संचालन आदित्य रूसिया ने और आभार मानसी मटकर ने व्यक्त किया। कार्यशाला के निर्देशक श्री पंकज सोनी, तकनीकि सहायक नीरज सैनी, मीडिया प्रभारी संजय औरंगाबादकर और मार्गदर्शक मंडल में श्री वसंत काशीकर, श्री जयंत देशमुख, श्री गिरिजा शंकर और श्री आनंद मिश्रा हैं। आज की मुख्य बातें-रंगमंच से दर्शकों को जोड़ने के लिए किस तरह की योजनाएं बनाना चाहिए। यदि दर्शक रंगमंच के पास नहीं आ रहे हैं तो कलाकारों को उनके पास जाकर मंचन करना चाहिए।दर्शकों को अच्छे नाटक दिखाकर उनमें नाटक देखने की आदत डालना चाहिए। प्रत्येक स्कूल एवं कॉलेजों में नाटक के प्रदर्शन किए जाना चाहिए। रंगमंच को एक आईना समझना चाहिए जो आपके व्यक्तित्व को संवारता है।

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