अंधेरा है तो ही रोशनी है-अवतार साहनी

अंधेरा है तो ही रोशनी है-अवतार साहनी

एंटरटेनमेंट डेस्क

अवतार साहनी


•नाट्यगंगा ऑनलाइन पाठशाला- नौवा दिन

छिंदवाड़ा । नाट्यगंगा द्वारा आयोजित ऑनलाइन एक्टिंग की पाठशाला के नौवें दिन देश के प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता, रंगकर्मी, नाट्य निर्देशक श्री अवतार साहनी जी ने कलाकारों को लाइट डिजाइनिंग की बारीकियों से अवगत करवाया। अवतार साहनी सर को लाइट डिजाइनिंग के लिए प्रतिष्ठित संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद जी के हस्ते प्राप्त हो चुका है। आपने दिल से, हाईवे, एन एक्सिडेंटल प्राइम मिनिस्टर जैसी हिट फिल्मों में अभिनय किया है। उन्होंने जितनी आसान भाषा में कलाकारों को लाइट डिजाइनिंग का प्रारंभ से लेकर अंत तक सिखाया उससे सभी लोग अभिभूत हो गए। लाइट डिजाइन करते समय किन बातों का ध्यान रखा जाता है, कौन सा रंग कब प्रयोग किया जाता है, दृश्यों के बीच कैसे लाइट का उपयोग किया जाता है, कम संसाधन में भी अच्छी लाइट कैसे की जाती है, लाइट को कलाकार की तरह कैसे उपयोग किया जा सकता है, लाइट कितने प्रकार के होते हैं सहित कई अन्य विषयों को इतने कम समय में इतनी निपुणता से समझाया कि सभी उपस्थित कलाकार दंग रह गए। सर ने एक महत्वपूर्ण बात कही कि लाइट डिजानर भी एक महत्वपूर्ण कलाकार है जिसे लाइट वाला कहकर अपमानित नहीं करना चाहिए। साथ ही सर ने कलाकारों के प्रश्नों का भी बहुत अच्छे से उत्तर दिया और तब तक समझाया जब तक प्रश्नकर्ता संतुष्ट नहीं हो गए। इतने महान कलाकार को इतनी सहजता से बात करते देख सभी कलाकार नतमस्तक हो गए। आज संचालन अंबर तिवारी और आभार दानिश अली ने किया। आज कार्यशाला में 44 कलाकारों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। कार्यशाला के निर्देशक श्री पंकज सोनी, तकनीकि सहायक नीरज सैनी, मीडिया प्रभारी संजय औरंगाबादकर और मार्गदर्शक मंडल में श्री वसंत काशीकर, श्री जयंत देशमुख और श्री आनंद मिश्रा हैं। आज की मुख्य बातें-अंधेरा होने पर ही रोशनी का महत्तव होता है। लाइट डिजाइनर भी मंचीय कलाकार की तरह महत्वपूर्ण होता है जिसे पूरे समय रिहर्सल में रहना चाहिए। मंच पर कैसे पता चलता है कि हम लाइट में हैं या नहीं। नाटक के देश, काल और परिस्थिति के अनुसार लाइट को डिजाइन करना चाहिए। लाइट और सेट के रंगो का संयोजन कैसे किया जाना चाहिए।

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