"माटी के रंग किरदार के संग" का हुआ आगाज़

एमपी नाउ डेस्क

•आंचलिक रंगयात्रा पर आधारित रहा ऑनलाइन नाट्य कार्यशाला का प्रथम दिवस



छिंदवाड़ा । जिले के कला जगत में नवाचार के लिए जानी जाने वाली जिले की अग्रणी नाट्य संस्था किरदार संस्थान छिंदवाड़ा द्वारा ऑनलाइन नाट्य कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यशाला के विषयों के साथ ही इसका शीर्षक भी आकर्षण का केन्द्र माना जा रहा है। कार्यशाला का शीर्षक माटी के रंग किरदार के संग रखा गया है। जिसमें विविध विषयों पर वरिष्ठ कलाकारों द्वारा शिक्षाप्रद विचारों एवं अनुभवों का समागम किया जा रहा है।



किरदार संस्थान के सचिव ऋषभ स्थापक ने बताया कि कला को सीमाओं में बांधना सम्भव नहीं है इस हेतु एक विस्तृत ऑनलाइन कार्यशाला का आयोजन किरदार द्वारा किया जा रहा है जिससे कोई भी जिज्ञासु कलाकार जुड़कर लाभ प्राप्त कर सकते हैं । इस महत्वपूर्ण कार्य को करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसित रंग संस्था ओम मंच पर अस्तित्व अपना सकारात्मक सहयोग प्रदान कर रही है । प्रथम दिवस के अतिथि विद्वान के रूप में ख्यातिलब्ध कवि, छिन्दवाड़ा रंगकर्म के पितृपुरुष एवं राष्ट्रपति पुरुस्कार से सम्मानित शिक्षक विजय आनंद दुबे उपस्थित रहे।


 श्री दुबे द्वारा छिंदवाड़ा की रंगयात्रा का विस्तृत वर्णन करते कहा गया कि छिन्दवाड़ा जिले की रामलीला लोकरंग का ही स्वरूप है, जिसका इतिहास 131 वर्ष पुराना है इसके पूर्व भी तामिया पातालकोट के अंचलों में रंगकर्म के पर्याप्त साक्ष्य पाए जाते है । उन्होंने महान स्वतंत्रता सेनानी बादल भोई का जिक्र करते हुए बताया कि आजादी की लड़ाई में रामसत्ता के माध्यम से गाथा गायन को भी वाचिक अभिनय से ओत-प्रोत रंगकर्म के योगदान की भी चर्चा की। संस्था के अध्यक्ष डॉ. पवन नेमा ने कहा कि कोरोना महामारी ने जीवन की रफ्तार को रोकने की भरसक कोशिश की परन्तु जीवन, चलने का ही नाम है । जीवन को थामने के उपक्रम को रोकने के प्रयास ही नव सृजन का कारण होता है। कार्यशाला में तकनीकी सहयोगी के रूप में संस्था ओम के कलाकार विक्रम टांडेकर मुंबई से उपस्थित रहे। कार्यशाला में संयोजक के रूप में जुड़े जिले के युवा रंगकर्मी शिरिन आनन्द दुबे ने कहा कि छिंदवाड़ा का रंगकर्म अनेक विविधताओं से परिपूरित है अत: आगामी समय में कला के विविध रंगों से जोड़ने के लिए विभिन्न विषयों पर कार्यशालाओं के आयोजन सतत रूप से संचालित किये जाने की महती आवश्यकता है।

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