छिंदवाड़ा ऑनलाइन एक्टिंग की पाठशाला मुम्बई के कलाकारों के द्वारा

छिंदवाड़ा ऑनलाइन एक्टिंग की पाठशाला मुम्बई के कलाकारों के द्वारा

एमपी नाउ एंटरटेनमेंट डेस्क

छिंदवाड़ा । जिले की अग्रणी नाट्य संस्था नाट्यगंगा द्वारा ऑनलाइन एक्टिंग की पाठशाला का आयोजन किया जा रहा है। जिसके अंतर्गत देश के दिग्गज एक्टिंग गुरु संस्था के नए एवं पुराने कलाकारों को एक्टिंग के गुर सीखा रहे हैं। तालाबंदी के इस दौर में सोशल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म एक बेहतरीन विकल्प के रूप में सामने आया है। जूम एप के जरिये कलाकार देश दुनिया के दिग्गजों से रूबरू हो रहे हैं। कार्यशाला की दूसरी क्लास फिल्म एवं टेलीविजन के कला निर्देशक श्री जयंत देशमुख जी मुंबई ने ली। श्री जयंत देशमुख हिंदुस्तानी सिनेमा के आर्ट डायरेक्शन में एक बड़ा नाम हैं। वे मूलतः रायपुर से हैं और उनका कार्यक्षेत्र मुंबई है। उन्होंने अनेक सुपर हिट  फिल्मों एवं धारावाहिकों में कला निर्देशन किया है। बैंडिट क्वीन, दीवार सहित 80 फिल्मों और तारक मेहता का उल्टा चष्मा, ये रिश्ता क्या कहलाता है सहित 40 टीवी सीरियलों के सैट आपने ही बनाए है। इसके साथ ही आधुनिक हिंदी नाटकों में वे एक दिग्गज़ निर्देशकों में शुमार हैं। उनकी क्लास अटेंड करना नाट्यगंगा के कलाकारों के लिये किसी उपलब्धि से कम नहीं था। जयंत देशमुख इतने अच्छे वक्ता और प्रेमल हृदय के व्यक्ति हैं कि उनसे पहली बार ऑनलाईन मुलाकात होने पर भी ऐसा लगा मानों उन्हें वर्षों से जानते हों। आज की क्लास की कुछ मुख्य बातें इस प्रकार थीं :-
1 . नाटक या फ़िल्म का सैट कितना महत्वपूर्ण होता है। बेहतरीन आर्ट डायरेक्शन किसी फिल्म या नाटक को चार चांद लगा देता है। एक आर्ट डायरेक्टर को हमेशा डायरेक्टर के मन को पढ़ते आना चाहिये।
2 . नाटकों में बिम्बों का बहुत महत्व होता है। महज बिम्बों के जरिये ही बिना सैट के भी नाटक को प्रभावशाली बनाया जा सकता है।
3. एक एक्टर को हमेंशा अपने निर्देशक का एक्टर होना चाहिए।4. निर्देशक और एक्टर का रिश्ता तीर और कमान की तरह होता है। एक्टर निर्देशक की प्रत्यंचा में लगे तीर की तरह होता है। प्रत्यंचा का सही तनाव ही तीर को लक्ष्य तक ले जाता है।
5.एक नाटक को बनाना निर्देशक के लिये गर्भ धारण करने की तरह है।
6. किसी भी प्रोफेशन का व्यक्ति उस प्रोफेशन में तभी तक होता है जब तक वो कार्य स्थल में होता है।परंतु एक एक्टर का काम कभी खत्म नहीं होता। वो हर वक्त अपने किरदारों के बारे में ही सोचता रहता है।यह पूरी दुनिया ही उसकी वर्कशॉप है। उसका हर दिन सीखते हुए ही बीतता है।

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