गरीबी तेरे तीन नाम- झूठा, पाजी, बेईमान

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छिंदवाड़ा मप्र/जिले के कई विकासखंडों में प्रशासन का दोहरा चरित्र दिखाई दिया।जहाँ एक तरफ वीआईपी लोगों के बच्चे को कोटा से लाया गया जिन्हें जिले की बड़े रिसोर्ट में मेडिकल जांच कर फिर खाना खिला कर होम क्वॉरेंटाइन किया गया, यहां तक कि उन्हें घर भेजने के लिए भी शासन प्रशासन के द्वारा गाड़ी मुहैया कराई गई। वहीं दूसरी तरफ उसी रिसोर्ट से सामने से गुजर रहे मजदूर जो कि रायपुर के किसी स्टील प्लांट मे काम करते थे , वह 550 किलोमीटर पैदल चलकर छिंदवाड़ा आए हैं उन्हें ना तो किसी बड़े रिसोर्ट में खाना खिलाया गया और ना ही घर पहुंचाने के लिए कोई गाड़ी की व्यवस्था कराई गई। इससे तो साफ हो गया कि इस कोरोना महामारी के बीच भी गरीब एवं अमीर मे फर्क कर प्रशासन का दोहरा रवैया सामने आ रहा है। आपको बता दे उस समय वहाँ रिसोर्ट पर सभी बड़े प्रशासनिक अधिकारी राजनीतिक दल के प्रमुख मौजूद थे मगर कहते है न ""गरीबों ने रोज़े रखे तो दिन ही बड़े हो गए"" ज्ञात हो जिले से बाहर बड़ी संख्या में छिंदवाड़ा से मजदूर वर्ग कार्य करने जाते है देश मे घोषित लॉक डाउन के बीच सभी अपने अपने घर मे वापिस आने की जद्दोजहद कर रहे है जिले के अंदर कई ऐसे मामले नजर आए जहाँ ये तबका भूखा प्यासा सैकड़ो किलोमीटर की दूरी पैदल यात्रा कर अपने गंतव्य मे पहुँचने की कोशिश कर रहा है ये सब बातें देख कर मन मे एक ही बात आती है............ """गरीबी तेरे तीन नाम- झूठा, पाजी, बेईमान"""""

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